रायपुर उच्चभूमि में शस्य प्रतिरूप एवं शस्य गहनता: एक भौगोलिक अध्ययन
सुशीला नरेटी1, उमा गोले2
1शोधछात्रा, भूगोल अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत ।
2प्राध्यापक, भूगोल अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत ।
*Corresponding Author E-mail: sushilanareti558@gmail.com, umagole@rediffmail.com
ABSTRACT:
देश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कृषि के उन्नत विकास के लिए कृषकों को शस्य प्रतिरूप की जानकारी होनी चाहिए। शस्य प्रतिरूप किसी प्रदेश में एक निश्चित समय में विभिन्न क्षेत्रों के अन्तर्गत अनेक फसलें बोई जाती है, शस्य प्रतिरूप का वितरण वर्षा की मात्रा, मिट्टी की उर्वरा क्षमता, आर्द्रता एवं तापमान के द्वारा नियन्त्रित होता है। अध्ययन क्षेत्र छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिण -पूर्व में स्थित है, जिसकी समुद्र तल से ऊँचाई 300-600 मीटर के मध्य है, इस क्षेत्र में कृषि मानसून आधारित होती है, जिस कारण से अध्ययन क्षेत्र पर मुख्यतः खरीफ शस्यों का उत्पादन किया जाता है, जिलों में भाटा, डोरसा, व कन्हार, मिट्टी का विस्तार पाया जाता है। अध्ययन क्षेत्र में कुल फसली क्षेत्र का 72.89 प्रतिशत क्षेत्रफल पर खरीफ एवं 27.11 प्रतिशत क्षेत्रफल पर रबी शस्यों का उत्पादन होता है। जिसमें धान प्रमुख फसल है। रायपुर उच्चभूमि में शस्य गहनता सूचकांक 134 है, जो राज्य के 124 शस्य गहनता सूचकांक से (10) अधिक है।
KEYWORDS: शस्य प्रतिरूप, खरीफ फसल, रबी फसल, शस्य गहनता ।
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किसी क्षेत्र विशेष में विशिष्ट समयावधि में उगाई जाने वाली विविध फसलों के क्षेत्रीय वितरण से बने प्रारूप को शस्य प्रतिरूप कहा जाता है। इसके अन्तर्गत प्रत्येक फसल क्षेत्र के प्रतिरूप की गणना करने के पश्चात फसलों को श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है, जिससे क्षेत्र विशेष की आर्थिक एवं सामाजिक पहलुओं की जानकारी मिलती हैं। फसल प्रतिरूप का अध्ययन जटिल है, वास्तव में फसल प्रतिरूप पर भौतिक, सामाजिक एवं आर्थिक कारकों का प्रभाव प्रतिबिम्बित होती है (सिंह,1992) शस्य प्रतिरूप विश्व में एक समान वितरण नहीं है, किसी क्षेत्र में कोई फसल बेहतर है, तो अन्य क्षेत्र में उसकी स्थिति गौण है (सिंह, एवं ढिल्लों, 2002) अध्ययन क्षेत्र में सर्वाधिक खरीफ फसलों का उत्पादन किया जाता है, जो मुख्य रूप से वर्षा पर आधारित है।
उद्देश्य:
अध्ययन क्षेत्र के शस्य प्रतिरूप एवं शस्य गहनता का विश्लेषण करना ।
अध्ययन क्षेत्र:
रायपुर उच्चभूमि छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिण-पूर्व दिशा में अवस्थित है। रायपुर उच्चभूमि 19º46’ 12‘‘ से 21º5’ 28‘‘ उत्तर अक्षांश एवं 81º24’ 47’’ से 82º43’ 52’’ पूर्व देशांश के मध्य 8917.78 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत हैं। रायपुर उच्चभूमि के उत्तर में दूर्ग रायपुर एवं महासमुन्द, दक्षिण पूर्व में उड़ीसा राज्य, दक्षिण पश्चिम में कोन्डागांव, पश्चिम में कांकेर एवं उत्तर पश्चिम में बालोद जिला स्थित है। रायपुर उच्चभूमि की समुद्रतल से ऊँचाई 400 - 800 मी. है। क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ महानदी, सोढुर एवं पैरी है। प्रशासनिक रूप से रायपुर उच्चभूमि 9 तहसील एवं विकासखण्ड (फिंगेश्वर, गरियाबन्द, छुरा, मैनपुर, देवभोग, धमतरी, कुरूद, मगरलोड, एवं नगरी) में विभक्त है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 13,97,436 है, जिसमें 49.64 प्रतिशत पुरूष एवं 50.36 प्रतिशत महिला जनसंख्या निवासरत् है। इस जिले में विशेष पिछड़ी कमार और भंुजिया जनजाति के लोग निवासरत है।
आंकड़ो के स्रोत एवं विधितन्त्र:
प्रस्तुत शोध पत्र पूर्णतः द्वितीयक आंकडों पर आधारित है, आंकड़ों की प्राप्ति हेतु जिला सांख्यिकी पुस्तिका 2020-21 कार्यलय कलेक्टर (जिला योजना एवं सांख्यिकी) जिला गरियाबंद, धमतरी (छ.ग.) एवं संचालनालय कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ रायपुर, 2020-21 संकलित किया गया है। विश्लेषित प्राप्त आंकड़ो का अध्ययन को सुगम एवं बोधगम्य बनाने हेतु सारणी एवं मानचित्र का उपयोग किया गया है, एवं शस्य गहनता को निम्न सूत्र से ज्ञात किया गया है-
सकल फसल क्षेत्रफल
शस्य गहनता = –––––––––––––––––––– × 100
निरा बोया गया क्षेत्र
शस्य प्रतिरूपः
एक समय विशेष पर विभिन्न शस्यों के अधीन आनुपातिक क्षेत्र प्रदेश के शस्य प्रतिरूप को सूचित करता है। यह अवधारणा परिवर्तन होती रहती है, क्योंकि समय व स्थान के साथ यह परिवर्तनशील रहती है। किसी प्रदेश की जलवायु दशाओं, सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दशाओं का शस्य प्रतिरूप के साथ घनिष्ट सम्बन्ध होता है। रायपुर उच्चभूमि में मुख्य रूप से खरीफ एवं रबी की फसलें उगाई जाती है।
खरीफ फसल:
खरीफ फसलें दक्षिण पश्चिम मानसून (जून) के आगमन के दौरान बोई जाती है, एवं शीत ऋतु के प्रारंभ में फसल काट ली जाती है। खरीफ की फसल में मुख्यतः धान, कोदो-कुटकी, मक्का अरहर मूंग सम्मिलित है। अध्ययन क्षेत्र में कुल फसली क्षेत्रफल का 72.89 प्रतिशत खरीफ शस्य के अर्न्तगत सम्मिलित है, जिसमे मुख्यतः खाद्यान्न फसलें है। जिसमें 97.93 प्रतिशत क्षेत्रफल में अनाज, 1.36 प्रतिशत क्षेत्रफल में दलहन एवं 0.20 प्रतिशत क्षेत्र में तिलहन की फसलें बोई जाती है, एवं शेष 0.50 प्रतिशत क्षेत्रफल पर अन्य फसलें ली जाती है। अनाजों में धान की फसल प्रमुख है, जिसका कारण है, उच्चभूमि का मुख्य आहार चावल है, जो कुल खरीफ फसली क्षेत्रफल का 95.52 प्रतिशत है, जबकि 2.41 प्रतिशत क्षेत्रफल मक्का एवं 0.01 प्रतिशत क्षेत्र कोदो-कुटकी के अन्तर्गत सम्मिलित है। दलहनों में 0.74 प्रतिशत क्षेत्र उड़द, 0.41 प्रतिशत अरहर, 0.01 प्रतिशत मूंग है। तिलहनों में मूंगफली 0.16 प्रतिशत, तिल 0.04 प्रतिशत है।
सारणी क्रमांक -1: रायपुर उच्चभूमि: खरीफ शस्य प्रतिरूप, 2020-21
|
क्र. स. |
फसल का नाम |
खरीफ फसल |
|||||
|
गरियाबंद |
धमतरी |
योग |
|||||
|
हेक्टेयर |
प्रतिशत |
हेक्टेयर |
प्रतिशत |
हेक्टेयर |
प्रतिशत |
||
|
1 |
धान |
121.42 |
92.64 |
138.93 |
98.18 |
260.35 |
95.52 |
|
2 |
कोदो-कुटकी |
0.02 |
0.02 |
0.01 |
0.01 |
0.03 |
0.01 |
|
3 |
मक्का |
5.92 |
4.52 |
0.62 |
0.44 |
6.58 |
2.41 |
|
योग अनाज |
127.36 |
97.18 |
139.56 |
98.63 |
266.92 |
97.93 |
|
|
4 |
अरहर |
1.09 |
0.83 |
0.04 |
0.03 |
1.13 |
0.41 |
|
5 |
उड़द |
1.25 |
0.95 |
0.76 |
0.54 |
2.01 |
0.74 |
|
6 |
मूंग |
0.01 |
0.01 |
0.02 |
0.01 |
0.02 |
0.01 |
|
7 |
कुल्थी एवं अन्य दलहन |
0.35 |
0.27 |
0.19 |
0.13 |
0.54 |
0.20 |
|
योग दलहन |
2.70 |
2.06 |
1.01 |
0.71 |
3.71 |
1.36 |
|
|
8 |
मूंगफली |
0.43 |
0.33 |
0 |
0.00 |
0.43 |
0.16 |
|
9 |
तिल |
0.09 |
0.07 |
0.02 |
0.01 |
0.11 |
0.04 |
|
योग तिलहन |
0.52 |
0.40 |
0.02 |
0.01 |
0.54 |
0.20 |
|
|
10 |
साग-सब्जी |
0.48 |
0.37 |
0.91 |
0.64 |
1.39 |
0.51 |
|
महायोग |
131.06 |
100.00 |
141.5 |
100 |
272.56 |
100.00 |
|
स्रोतः- संचालनालय कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ रायपुर, 2020-21
प्रमुख खरीफ फसलें:
धान:
अध्ययन क्षेत्र में खरीफ फसली क्षेत्र के अन्तर्गत धान प्रमुख फसल है। वर्ष 2020-21 में कुल खरीफ फसली क्षेत्र (72.89) का 95.52 प्रतिशत पर एवं अनाज के 97.54 प्रतिशत क्षेत्र पर धान की खेती की जाती है, जिसका कारण है, उच्चभूमि की जनसंख्या का अधिकांश भाग दैनिक भोजन में चावल का ही उपयोग करते हैं। वर्ष 2020-21 में अध्ययन क्षेत्र के धमतरी जिले में 98.18 प्रतिशत एवं गरियाबंद जिले में 92.64 प्रतिशत क्षेत्र पर धान की फसल बोई गई है।
कोदो-कुटकी:
कोदो-कुटकी की फसल मोटे अनाज के अन्तर्गत सम्मिलित है, इस फसल को मुख्यतः वनाच्छादित भूमि पर, उच्च धरातलीय भाग, ढाल क्षेत्र एवं अल्प उपजाऊ भूमि पर उगाई जाती है। रायपुर उच्चभूमि में कुल फसली क्षेत्र के 0.01 प्रतिशत क्षेत्र पर बोई जाती है, जिसका कारण है, वर्तमान में खाद्यान्न के रूप में कोदो कुटकी का न्यून उपयोग एवं चावल का अधिक उपयोग होना है।
मक्का:
मक्का एक खाद्यान्न फसल है, इस फसल की खेती दोनों मौसम (खरीफ एवं रबी) में की जाती है। अध्ययन क्षेत्र में कुल फसली क्षेत्र का 2.41 प्रतिशत एवं अनाज के 2.53 प्रतिशत क्षेत्रफल पर मक्के की खेती होती है। वर्ष 2020-21 में 6.58 प्रतिशत धमतरी एवं 4.52 प्रतिशत गरियाबंद जिले में मक्का का उत्पादन किया जाता है।
अरहर:
अरहर अध्ययन क्षेत्र की दूसरी महत्वपूर्ण खरीफ दलहन फसल है, अरहर कुल फसली क्षेत्र का 0.41 प्रतिशत एवं कुल दलहन फसल का 30.46 प्रतिशत है। 0.83 प्रतिशत गरियाबंद एवं 0.03 प्रतिशत धमतरी जिले से प्राप्त हुआ है।
उड़द:
उड़द अध्ययन क्षेत्र की प्रथम महत्वपूर्ण खरीफ दलहन फसल है, यह फसल कुल फसली क्षेत्र का 0.74 प्रतिशत एवं कुल दलहन का 54.18 प्रतिशत क्षेत्रफल पर बोई गई है।
अन्य दलहन:
अन्य दलहन में मूंग और कुल्थी सम्मिलित है, जो कुल फसली क्षेत्र का 0.21 प्रतिशत एवं कुल दलहन के 15.09 प्रतिशत क्षेत्रफल पर मूंग एवं कुल्थी बोई जाती है।
तिलहन:
अध्ययन क्षेत्र में तिलहन फसलों के अन्तर्गत मूंगफली एवं तिल का उत्पादन किया जाता है। कुल फसली क्षेत्र का 0.20 प्रतिशत है, जिसमें मूंगफली 0.16 एवं तिल 0.04 प्रतिशत क्षेत्र है।
साक-सब्जी:
मौसमी साक- सब्जियों का हमारे दैनिक आहार में प्रमुख स्थान होता है, यह स्वास्थ्य के विकास में एवं शरीर को पोषक तत्व के रूप में विटामिन प्रदान करते हैं। उच्चभूमि में कुल फसली क्षेत्र का 0.51 प्रतिशत क्षेत्र पर साक सब्जी उगाई जाती है।
रबी फसल:
रबी फसल सिंचाई पर निर्भर होती है, यह नवम्बर में बोई जाती है एवं मध्य मार्च तक काट ली जाती है। रायपुर उच्चभूमि में कुल फसली क्षेत्र का 27.11 प्रतिशत रबी फसल के अन्तर्गत सम्मिलित है, जिसका मुख्य कारण वर्षा आधारित कृषि, एवं विषम धरातल होने के कारण सिंचाई सुविधाओं की कमी है। अध्ययन क्षेत्र में प्रमुख फसल धान 79.76 प्रतिशत, गेहूँ, 0.93 प्रतिशत, मक्का 0.29 प्रतिशत, चना 5.81 प्रतिशत, तिवरा 9.66 प्रतिशत, राई-सरसों 0.79 प्रतिशत, मटर 1.80 प्रतिशत, एवं साग-सब्जी 1.22 प्रतिशत है।
प्रमुख रबी फसलें:
धान:
अध्ययन क्षेत्र में रबी फसल में धान प्रमुख फसल है, वर्ष 2020-21 में रबी फसल का 78.67 प्रतिशत एवं अनाज के 98.41 प्रतिशत क्षेत्रफल पर धान बोई जाती है। अध्ययन क्षेत्र में 88.46 प्रतिशत गरियाबंद एवं 75.09 प्रतिशत धमतरी जिले में धान बोई जाती है, गरियाबंद जिले में धान का अधिक क्षेत्रफल होने का कारण सिंचाई सुविधा उपलब्ध होना एवं धमतरी में न्यून होने का कारण जल संरक्षण एवं मृदा संरक्षण के लिए फसल चक्र के माध्यम से दलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
गेहूँ:
रायपुर उच्चभूमि में गेहूँ की फसल, कुल रबी क्षेत्र का 0.93 प्रतिशत एवं अनाज के 1.16 प्रतिशत क्षेत्रफल खेती की जाती है, जिसमें 1.04 प्रतिशत धमतरी एवं 0.62 प्रतिशत क्षेत्रफल में गेहूँ फसल बोई जाती है। अध्ययन क्षेत्र में गेहूँ का क्षेत्रफल कम है, जिसका कारण है, क्षेत्र में मिट्टी में नमी तथा सिंचाई साधनों की कमी है, उन्हीं क्षेत्रों पर निम्न श्रेणी के गेहूँ की खेती की जाती है।
सारणी क्रमांक -2: रायपुर उच्चभूमि: रबी शस्य प्रतिरूप, 2020-21
|
क्र. |
फसल का नाम |
रबी फसल |
|||||
|
गरियाबंद |
धमतरी |
योग |
|||||
|
हेक्टेयर |
प्रतिशत |
हेक्टेयर |
प्रतिशत |
हेक्टेयर |
प्रतिशत |
||
|
1 |
धान |
24.07 |
88.46 |
55.69 |
75.09 |
79.76 |
78.67 |
|
2 |
गेहू |
0.17 |
0.62 |
0.77 |
1.04 |
0.94 |
0.93 |
|
3 |
मक्का |
0.03 |
0.11 |
0.26 |
0.35 |
0.29 |
0.29 |
|
4 |
रागी, जौ |
0.01 |
0.04 |
0.05 |
0.07 |
0.06 |
0.06 |
|
योग अनाज |
24.28 |
89.23 |
56.77 |
76.55 |
81.05 |
79.94 |
|
|
5 |
उड़द |
0 |
0.00 |
0.03 |
0.04 |
0.03 |
0.03 |
|
6 |
चना |
0.33 |
1.21 |
5.56 |
7.50 |
5.89 |
5.81 |
|
7 |
तिवरा, तिवड़ा |
0.83 |
3.05 |
8.96 |
12.08 |
9.79 |
9.66 |
|
8 |
मूंग |
0.46 |
1.69 |
0.01 |
0.47 |
0.47 |
0.46 |
|
9 |
मसूर |
0.02 |
0.07 |
0.11 |
0.15 |
0.13 |
0.13 |
|
10 |
मटर |
0.88 |
3.23 |
0.94 |
1.27 |
1.82 |
1.80 |
|
11 |
अन्य दलहन |
0.01 |
0.04 |
0.03 |
0.04 |
0.04 |
0.04 |
|
योग दलहन |
2.53 |
9.30 |
15.64 |
21.09 |
18.17 |
17.92 |
|
|
12 |
मूंगफली |
0.02 |
0.07 |
0 |
0.00 |
0.02 |
0.02 |
|
13 |
अलसी |
0.00 |
0.00 |
0.04 |
0.05 |
0.04 |
0.04 |
|
14 |
राई, सरसो |
0.04 |
0.15 |
0.76 |
1.02 |
0.8 |
0.79 |
|
योग तिलहन |
0.06 |
0.22 |
0.8 |
1.08 |
0.86 |
0.85 |
|
|
18 |
गन्ना |
0.04 |
0.15 |
0.01 |
0.01 |
0.05 |
0.05 |
|
19 |
साग-सब्जी |
0.30 |
1.10 |
0.94 |
1.27 |
1.24 |
1.22 |
|
योग अन्य |
0.34 |
1.25 |
0.95 |
1.28 |
1.29 |
1.27 |
|
|
महायोग |
27.21 |
100.00 |
74.16 |
100 |
101.37 |
100.00 |
|
स्रोतः- संचालनालय कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ रायपुर, 2020-21
अन्य अनाज:
अध्ययन क्षेत्र में अन्य अनाज में कुल रबी फसल का 0.29 प्रतिशत मक्का एवं जौ एवं रागी 0.06 प्र्रतिशत है।
तिवरा:
तिवरा या तिवड़ा अध्ययन क्षेत्र की महत्वपूर्ण दलहन फसल है। यह कुल रबी फसली क्षेत्र का 9.66 प्रतिशत एवं दलहन के 53.89 प्रतिशत क्षेत्रफल में धान के क्षेत्रों में बोई जाती है।
चना:
चना मध्यम या निम्न वर्षा एवं हल्की आर्द्रता धारक मृदा पर खेती की जाती है, अध्ययन क्षेत्र में कुल रबी फसली क्षेत्र का 5.81 प्रतिशत एवं कुल दलहन के 32.42 प्रतिशत क्षेत्रफल पर बोई गई है।
अन्य दालें:
रायपुर उच्चभूमि में अन्य दालों में मटर 1.82 प्रतिशत, मूंग 0.47 प्रतिशत, मसूर 0.15 प्रतिशत एवं उड़द 0.03 प्रतिशत है। अध्ययन क्षेत्र में कुल रबी फसली क्षेत्र में अन्य दालों का 1.94 प्रतिशत एवं कुल दलहन के 13.48 प्रतिशत क्षेत्र है।
तिलहन:
अध्ययन क्षेत्र में तिलहन कुल रबी फसली क्षेत्र का 0.85 प्रतिशत है, जिसमें सर्वाधिक राई एवं सरसो 0.79 प्रतिशत, अलसी 0.04 प्रतिशत, मूंगफली 0.02 प्रतिशत है।
अन्य फसल:
रायपुर उच्चभूमि में अन्य रबी फसल में साग-सब्जी 1.27 प्रतिशत एवं गन्ना 0.05 प्रतिशत है।
शस्य गहनता:
किसी एक कृषि वर्ष में किसी भूमि से उगाई गई फसलों की संख्या है। सकल कृषित भूमि को शुध्द बोए गए क्षेत्र के प्रतिशत को कुषि गहनता का सूचक माना जाता है (कुमार एवं शर्मा 2024)। रायपुर उच्चभूमि की फसल सघनता की गणना हेतु सिंह, (1979) द्वारा निर्मिति उपयुक्त सूत्र का प्रयोग करके फसल गहनता सूचकांक का परिकलन कर अध्ययन क्षेत्र को सामान्य वर्ग अन्तराल विधि के आधार पर उच्च, मध्यम एवं निम्न में वर्गीकृत किया गया है।
सारणी क्रमांक-3: रायपुर उच्चभूमि: तहसीलवार शस्य गहनता सूचकांक, 2020-21
|
क्र. |
जिला |
तहसील |
सकल कृषित क्षेत्रफल |
निरा बोया गया क्षेत्रफल |
शस्य गहनता सूचकांक |
|
1 |
गरियाबंद |
फिंगेश्वर |
42389 |
30308 |
140 |
|
गरियाबंद |
24862 |
20620 |
121 |
||
|
छुरा |
29698 |
26820 |
111 |
||
|
मैनपुर |
37169 |
35312 |
105 |
||
|
देवभोग |
23754 |
23050 |
103 |
||
|
2 |
धमतरी |
धमतरी |
60413 |
34191 |
177 |
|
कुरूद |
76473 |
46413 |
165 |
||
|
मगरलोड |
36798 |
25964 |
142 |
||
|
नगरी |
43038 |
36073 |
119 |
||
|
रायपुर उच्चभूमि |
|
374594 |
278751 |
134 |
स्रोतः जिला सांख्यिाकि पुस्तिका 2020-21
उच्च शस्य गहनता:
रायपुर उच्चभूमि में >152 से अधिक उच्च शस्य गहनता में सम्मिलित है, जिसमें धमतरी (177) एवं कुरूद (165) तहसील से प्राप्त हुई है, जिसका प्रमुख कारण है, इन तहसीलों में नहरों एवं नलकूप के माध्यम से सिंचाई, उर्वर मृदा, जनसंख्या का भूमि पर उच्च दबाव के कारण सीमांत जोतो की अधिकता, उन्नत बीजों का प्रयोग से इन तहसीलों में उच्च शस्य गहनता स्तर है।
मध्यम शस्य गहनता:
मध्यम शस्य गहनता के अन्तर्गत मगरलोड (142) एवं फिंगेश्वर (140) तहसील से प्राप्त हुई है। जिसका प्रमुख कारण है, मगरलोड एवं फिंगेश्वर तहसील के सभी क्षेत्र पर रबी फसल के लिए सिंचाई सुविधा का अभाव एवं भाटा मिट्टी का विस्तार जिससे उर्वर भूमि की कमी है।
सारणी क्रमांक-4: रायपुर उच्चभूमि: शस्य गहनता स्तर, 2020-21
|
क्र. |
शस्य गहनता सूचकांक |
गहनता स्तर |
तहसील संख्या |
तहसील |
|
1 |
>152 से अधिक |
उच्च |
2 |
धमतरी, कुरूद |
|
2 |
129-152 |
मध्यम |
2 |
मगरलोड, फिंगेश्वर |
|
3 |
<128 से कम |
निम्न |
5 |
गरियाबंद, नगरी, छुरा, मैनपुर, देवभोग |
स्रोतः जिला सांख्यिाकि पुस्तिका 2020-21
निम्न शस्य गहनता:
रायपुर उच्चभूमि में निम्न शस्य गहनता सबसे अधिक 5 तहसील में प्राप्त हुआ है, जिसमें गरियाबंद (121), नगरी (119), छुरा (111), मैनपुर (105) एवं देवभोग (103) है, इन तहसीलों में कृषि में मानसून पर निर्भरता है, सिंचाई सुविधा का अभाव, उन्नत बीजो की कमी, पहुच मार्गो की कमी के कारण निम्न शस्य गहनता है।
निष्कर्ष:
रायपुर उच्चभूमि में धान प्रमुख फसल है, प्रदेश में मानसून पर निर्भरता के कारण खरीफ शस्यों (72.89%) की प्रधानता है, वहीं रबी शस्यों का क्षेत्रफल (27.11%) न्यून है। उच्चभूमि में खाद्यान्न फसलों का क्षेत्रफल अधिक है, जिसमें अनाज (धान) मुख्य है। रायपुर उच्चभूमि में औसत शस्य गहनता सूचकांक 134 है, प्रदेश में उच्च शस्य गहनता सूचकांक उत्तरी क्षेत्र में पैरी महानदी बेसिन में वही निम्न शस्य गहनता सूचकांक दक्षिणी-पूर्वी उच्च प्रदेश में दृष्टव्य है। निम्न शस्य गहनता में विकास के लिए क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विकास, उन्नत बीजों एवं उर्वरकों का प्रयोग, मशीनीकरण का प्रयोग एवं फसल चक्र का उपयोग कर धान की फसल की प्रमुखता को कम कर भूमि की उर्वरा क्षमता में विकास करने की आवश्यकता है।
संदर्भ ग्रंथ सूची :-
1. Bhat. M. M . (2018), Agricultural Land-Use Pattern In Pulwama District Of Kashmir, International Journal of Creative Research Thoughts (IJCRT) www.ijcrt.org 666 www.ijcrt.org © Volume 6, Issu | ISSN: 2320-2882
2. Gole, Uma, (2006), Agriculture Intensity And Agricultrural Efficiency : A Geographical Analysis, THE SOCIAL PROFILE, A Research Journal of Social Sciences, 10(182): 9-16.
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Received on 02.12.2025 Revised on 12.01.2026 Accepted on 16.02.2026 Published on 17.03.2026 Available online from March 20, 2026 Int. J. Ad. Social Sciences. 2026; 14(1):39-44. DOI: 10.52711/2454-2679.2026.00010 ©A and V Publications All right reserved
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